Govt. College Dehri Established in 1972

Govt. College Dehri (H.P)

Contact Number 01893- 250024

प्राचार्य की कलम से...............................

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वर्तमान युग वैश्विक प्रतिस्पर्धा का युग है। इसमें यदि कुछ है तो वह है, मनुष्य की वैश्विक मैत्री की भावना। ‘‘अन्धेरे बन्द कमरे में एक खुला आकाश है जिसमें मेहनतकश इन्सान सितारे बन कर चमक रहे हैं’’। इस ब्रह्राण्ड को यदि किसी ने जोड़ा है तो वह है, विज्ञान। विज्ञान के चमत्कारों ने प्रत्येक व्यक्ति को देशकाल और कार्य की सीमा से बाहर निकाल कर एक लड़ी में पिरो दिया है।

जो बातें विगत में हमें कपोल कल्पित लगतीं थीं आज वही सुखद सत्य हैं। संसार का प्रत्येक व्यक्ति आपस में कम्प्यूटर और इन्टरनेट के माध्यम से जुड़ गया है। असंख्य विषयों और सूचनाओं को उंगली के एक इशारे मात्र से जान लेता है। मुझे लगा कि हमारे पास भी जो कुछ है उसे सभी से सांझा करें इसी कड़ी में प्रस्तुत है हमारे महाविद्यालय की वेबसाइट। यह मेरा नैतिक दायित्व है कि मैं अपने शिक्षण संस्थान से आप का परिचय करवाऊं। वजीर राम सिंह राजकीय महाविद्यालय देहरी सन् 1971 में नूरपुर के प्रतापी वंशज, देशभक्त एवं स्वतंत्रता सेनानी शहीद वज़ीर राम सिंह पठानिया की स्मृति में बनाया गया।

अनुभवी स्वतंत्रता सेनानी एवं रैहन के स्थानीय विधायक कामरेड रामचन्द्र और स्वर्गीय श्री ज्ञान सिंह पठानिया जो एक प्रशासनिक अधिकारी थे के महत्तवपूर्ण एवं अथक प्रयासों के लिए हम उनके ऋणी हैं जिन्हांेने स्थानीय निवासियों को इस शिक्षण संस्थान का स्वप्न दिखाया। जहाँ एक ओर ;खेहरद्ध पंचायत ने 202 कनाल भूमि दान कर इस स्वप्न को आधार भूमि प्रदान की, वहीं प्रत्येक वर्ग के स्थानीय निवासियों ने पूरे जोश और उत्साह से अपनी समर्थयानुसार आर्थिक सहायता प्रदान कर इस स्वप्न को आकार प्रदान करने में अपना योगदान दिया। अतः क्षेत्रिय निवासियों का उच्च शिक्षा के अवसर घर-द्वार पर पाने का अवसर तब पूर्ण होता दिखाई दिया जब सन् 1971 में बाथू मंदिर के महन्त श्री पुरषोत्तम दास जी द्वारा इसके भवन निर्माण की आधारशीला रखी गई। आरम्भ में महाविद्यालय में केवल कला संकाय के ही विषय पढ़ाए जाते थे, पर सन् 1981 में यहाँ वाणिज्य विषय की शिक्षा भी आरम्भ हुई। स्थानीय जनता की पुरज़ोर माँग, विद्यार्थियों एवं स्थानीय/क्षेत्रिय नेताओं के संघर्षमय प्रयासों के फलस्वरूप अप्रैल 1984 में इस महाविद्यालय का सरकारीकरण हुआ। इस सफलता के कुछ वर्षों में यहाँ विज्ञान संकाय भी विद्यार्थियों को उपलव्ध हो गया। तब से आज तक यह महाविद्यालय उतरोत्तर प्रगति करता गया और विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ती गई, क्योंकि यह महाविद्यालय न केवल फतेहपुर, ज्वाली, नूरपुर, इन्दौरा एवं गुलेर इन पाँच चुनाव क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए बल्कि समीप में पंजाब प्रांत के पठानकोट के विद्यार्थियों को भी कम खर्च में शिक्षा प्राप्त करवाने के लिए वरदान सिद्ध हुआ।

यह महाविद्यालय अब स्नातकोतर स्तर पर भी शिक्षा उपलब्ध करवा रहा है। सरकार एवं स्थानीय राजनेताओं के समक्ष की गई मांग एवं महाविद्यालय स्टाफ के प्रयासों के फलस्वरूप सन् 2011 में यहाँ ‘अर्थशास्त्र’ एवं सन् 2012 में ‘गणित’ विषय में स्नातकोतर कक्षाएँ आरम्भ हुईं। आज महाविद्यालय में स्नातक/स्नातकोतर स्तर पर भी शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हि.प्र. विश्वविद्यालय द्वारा यहां परीक्षा केन्द्र भी उपलब्ध करवाया गया है। हि0प्र0 सरकार की नई रूसा नीति के तहत अब सीबीसीएस शिक्षा प्रणाली को स्नातक स्तर पर अपनाया गया है। महाविद्यालय में छात्राओं की अधिक संख्या को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह संस्थान इस क्षेत्र में स्त्री-शिक्षा का उदाहरण है और उन्हे सक्षम एवं सशक्त करने में सहायक भी है। महाविद्यालय देहरी चाहे 34 वर्ष पहले ही अस्तित्व में आया है पर यह नए उभरते कई शिक्षण संस्थानों से तुलना करने पर मूलभूत ढांचागत सुविधाओं से वंचित है। इन सब कमियों के बाद भी इस संस्थान के विद्यार्थियों ने विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियां अर्जित कर महाविद्यालय को गौरवान्वित किया है। यहाँ शिक्षण के लिए वही भरा पूरा वातावरण है जो गुरू रवीन्द्रनाथ टैगोर के शान्ति निकेतन का है। ऐसे वातावरण में यहाँ के प्रबुद्व प्राध्यापक अपने विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखार रहे हैं।

यह महाविद्यालय विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने हेतु प्रतिवद्ध है। विधार्थी इस संस्था से शिक्षा ग्रहण कर न केवल अपने सपनों को साकार कर रहे हैं बल्कि योग्य नागरिक बन कर सामाजिक आपेक्षओं को भी पूरा कर रहे हैं। हमारा पूरा प्रयास रहता है कि हम अपने नौजवान विद्यार्थियों में शिक्षण के साथ-साथ चरित्रिक दृढ़ता और अदम्य साहस का भी विकास करें जिससे वह अपने जीवन की प्रत्येक चुनौती का सुगमता से सामना कर सकें। महाविद्यालय के प्रत्येक संकाय में अत्यन्त योग्य व शिक्षण अनुभवों से सम्पन्न प्राध्यापक हैं जो अपने विद्यार्थियों को आधुनिक दौड़ में पूरी तरह दक्ष व सक्षम बनाने में कार्यरत हैं। हमारा प्रयास रहता हैं कि हम विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों का विकास करें तथा उनके भीतर सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव जागृत करें, उनमें कत्तव्र्योें के प्रति श्रद्धा भाव उत्पन्न करें ताकि वह स्वयं को आधुनीकिकरण की दौड़ में बौना महसूस न करें। विद्यार्थियों को रूसा प्रणाली के तहत पढ़ाया जा रहा है जो उन्हे प्रतिस्पर्धा के युग में पूरी तरह सक्षम बनाएगा। इस प्रणाली को लागू करने के लिए हमारे पास कमरों की कमी है जिन्हें यथाशीघ्र दूर कर दिया जायेगा। इसके उपरान्त बीबीए, बीसीए, पीजीडीसीए, पर्यावरण व आपदा प्रबन्धन, ई वाणिज्य तथा व्यावहारिक अंग्रेजी आदि विषयों में भी बच्चों को शिक्षण देना आरम्भ करेंगे।

हमारे पास अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित रसायन, भौतिकी, जीव, वनस्पति विज्ञान, संगीत और आई.टी. की प्रयोगशालाएं हैं। बच्चों को सूचना एवं प्रौधोगिकी के क्षेत्र में आगे लाने के लिए 20 कम्पयूटरों से सुसज्तित कक्ष हैं जिसमें बच्चों को इन्टरनैट की सुविधा उपलव्ध करवाई गई है। महाविद्यालय के पुस्तकालय में विधार्थियों के लिए नवीनतम पुस्तकों का विशाल भण्डार है। इसके वाचनालय में 8 दैनिक समाचारपत्र तथा 10 अंग्रेजी की व हिन्दी की पत्र-पत्रिकाएं आती हैं। हमारे पास बच्चों के खेलने के लिए छोटे-बड़े तीन मैदान हैं जहां बच्चे किक्रेट, फुटबाल, हाॅकी, वाॅलीबौल, हैण्डबाल इत्यादि खेलते हैं यहां के बच्चे कुश्ती तथा भारोतोलन जैसी प्रतिस्पर्धाओं में सदैव जीतते हैं। राष्ट्रीय सेवा योजना की दो ईकाइयां यहां क्रियाशील हैं जिसमें 200 विधार्थी इस योजना के माध्यम से सेवा कार्य कर रहे हैं। रोवर्स रेंजर्स में 32 लड़के 32 लड़कियां हैं जो निरन्तर समाज सेवा से जुड़े हैं। रेड रिब्बन क्लव, एनर्जी क्लव व पर्यावरण क्लवों के माध्यम से बच्चे सामाजिक चेतना की जागृति से जुड़े हैं। महाविद्यालय में निरन्तर शैक्षणिक व सांस्कृतिक गतिविधियाँ चलती रहती हैं। प्राध्यापक बन्धु भी शैक्षणिक स्तर को ऊँचा उठाने के लिए समय समय पर राष्ट्रीय सेमीनारों का आयोजन करवाते रहते हैं। जीवन में सफलता के लिए बच्चों से आशा की जाती है कि वह अपनी सम्प्रेषण क्षमता को बढ़ायें। हमारे योग्य प्राध्यापक इसमें बच्चों को हर सम्भव सहयोग देते हैं। बाहर से विद्वजनों को बुलाकर बच्चों से उनका साक्षात्कार करवाया जाता है। परिसर में अच्छी अच्छी कम्पनियां आ कर बच्चों को उनकी योग्यतानुसार साक्षात्कार के बाद नौकरियां प्रदान करती हैं। यहां के बच्चे पुलिस बलों एवं सेना में जाना अधिक पसन्द करते हैं।

इस महाविद्यालय का अभी तक राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद् से मूल्यांकन नहीं हो पाया जिसके लिए हम प्रयासरत हैं और निकट भविष्य में यह मूल्यांकन करवा लिया जाएगा। हमारे महाविद्यालय में समाज के प्रत्येक वर्ग के विधार्थी का ध्यान रखा जाता है। सरकार की ओर से विभिन्न छात्रवृत्तियां बच्चों को प्रदान की जाती हैं। प्रदेश की छात्राओं से शिक्षण शुल्क नहीं लिया जाता है। शारीरिक रूप से असक्षम बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि वह मुख्य धारा से जुड़ सकें। महाविद्यालय में ऐसा स्वच्छ, सुन्दर वातावरण बनाने व उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने का सारा श्रेय सुयोग्य एवं मेेधावी प्राध्यापकों को जाता है जो अपने विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ-साथ उनके शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक विकास का भी पूरा-पूरा ध्यान रखते हैं। मैं अपने महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक विधार्थी के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करता हूं। बच्चों की पढ़ने की बलवती इच्छा और उनकी हमसे जो आशाएँ हैं और आँकाक्षाएँ हैं वह हमें अपने प्रयास को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहयोग करती हैं।

आइये हम सब मिल कर इस महाविद्यालय के माध्यम से अपने अपने जीवन के लक्ष्यों को पूरा करें।

आपका अपना

अशीथ कुमार।

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